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Risky but beautiful – Awaargi to Bhagner ka Kund

“Saquib Khan is one of our esteemed Junoonis who has been accompanying us since last year on various treks. Junoon Adventure gives him full credit for writing this wonderful description of Junoon’s Awaargi Trek to Bhagner Ka Kund. This blog can also be read on his website https://andaze-juda.blogspot.com/2019/12/blog-post.html” – JUNOON ADVENTURE

ऊपर स्पाइडर्स और पैरों की नीचे गेंदनुमा गोल पत्थर, संभलें या बचें, क्योंकि एक गलत कदम आपको कर सकता था घायल

हर एक बढ़ते कदम के साथ स्पाइडर्स की तादात और खतरा तो बढ़ ही रहा था और हर एक कदम के नीचे गेंदनुमा गोल-गोल पत्थर, ऊपर स्पाइडर्स से बचें या फिर पैरों की नीचे आने वाले गोल पत्थरों से संभलें, क्योंकि एक गलत कदम आपके पैर की खतरनाक हो सकता था। यह ट्रैकअपने आप  में एक अनोखा अनुभव रहा। सतपुड़ा की पहाड़ियों में बसा बागनेर के कुंड की, जहां तक पहुंचाने वाला रास्ता  कहने को तो यह एक सामान्य फॉरेस्ट जैसा ही नजर आता है। मगर सच तो यह है कि यहां पर ट्रैकिंग लवर्स के लिए कई ऐसे चैलेंज छुपे हैं जो कि साधारणत: यहां पहुंचने वाले ट्रैकर्स ही समझ सकते हैं। बता दें कि रविवार को Junoon Adventureकी आवारगी श्रंखला के अंतर्गत 50 जुनूनी ट्रैकर्स ने रविवार को यहां ट्रैकिंग की, साथ ही पास में बसे गांव और वहां के लोगों के रहन सहन को भी समझा। इस दौरान 6 साल के बच्चे से लेकर 50 की उम्र तक के लोग शामिल रहे।

चैलेंजेस
स्पाईडर्स
इस ट्रैकिंग में शामिल होने वाले ट्रैकर्स की मानें तो यह पहली ऐसी जगह थी जहां चलने में पहली बार बहुत दिक्कत आई, जैसे-जैसे जंगल सुकड़ रहा था वैसे-वैसे स्पाईडर्स का खतरा भी बढ़ रहा था। इस दौरान बढ़ी -बढ़ी जंगली स्पाईडर्स की संख्या हर एक आगे बढ़ते कदम के साथ बढ़ती जा रही थी। इससे पहले जुनून एडवेंचर के एक अन्य ट्रैक (नवंबर 2018- रातापानी जंगल सेंचुरी) में इस तरह की मकड़ियों का सामना ट्रैकर्स कर चुके हैं।

पहली बार हुई को ह्यूमन एक्टिविटी
जुनून एडवेंचर से मिशी भटनागर ने बताया कि बाघनेर का कुंड पर अभी तक किसी प्रकार की कोई ह्यूमन एक्टिविटी या फिर ट्रैकिंग आदि आज तक नहीं हुई। यह पहली बार था कि 50 ट्रैकर्स इस लोकेशन पर पहली बार पहुंचे। यहां ट्रैकर्स ने गांव के परिवेश को समझा, और जाना कि किस तरह से लोग आज भी उन जगहों पर आसानी से रह रहे हैं जहां रहने के लिए बहुत ही कम भौतिक सुविधाएं मौजूद हैं।

एक गलत कदम आपको कर सकता था घायल
टीम जुनून ने ट्रैक शुरु होने से पहले की एक खास इंस्ट्रक्शन सभी को दिए थे जिसमें बताया गया था कि ‘यहां सारे पत्थर गोल हैं संभलकर चलें’ जैसे-जैसे जंगल में बनी ट्रैल्स सुकड़ रहीं थी वैसे वैसे रास्ते में पड़े गोल पत्थर जो कि पूरी तरह से गेंदनुमा थे यह चलने में एक बड़ी बाधा बने, कई लोग इस पर फिसलकर गिरे भी, मगर संभलकर चलने वाले इस पर संयम दिखाते हुए चले। क्योंकि एक गलत कदम आपको घायल कर सकता था।

ऐसे करता है फॉरेस्ट डिपार्टमेंट वाइल्ड एनीमल्स की गिनती
हमें ट्रैकिंग के दौरान कुछ ऐसे स्पॉट दिखाए जहां फॉरेस्ट डिपार्टमेंट ने मिट्टी को भुरभुरी कर के डाला हुआ था जिस पर से जब कोई जानवर गुजरता है तो विभाग उसकी मार्किंग करता है। हम सभी को खास इंस्ट्रक्शन थे कि हमें उस पैच के ऊपर से नहीं गुजरना। यह पहला ऐसा ट्रैक भी रहा जहां से अभी तक प्लास्टिक गारबेज पूरी तरह से नहीं पहुंचा है। तब भी कई जुनूनी ट्रेकर्स ने थोड़ी बहुत संख्या में मिलने वाले प्लाटिक को भी जंगल से कलेक्ट किया।